शायरी ऐ महताब
Wednesday, November 30, 2011
एहसास
जाने क्या बात है उनकी निगाहों में
की उनका अक्स दिल में उतर गया है
चलते है राहों में तनहा बेसबब हम
हर वक़्त उनके साथ का एहसास होता है
Tuesday, November 22, 2011
नसीब
नसीब से गरीब
दिल
का अमीर था
चाह के तड़पना मेरा नसीब था
चाह कर भी कुछ कर न सके हम
प्यासे तडपते
रहे हम
और पानी
करीब था
Sunday, November 20, 2011
जाने क्यों
गले लगाना हो जिसको उसे छोड़ देते हैं
आस्तीन में सांप लोग पाल लेते हैं
जाने क्यों नहीं करते उनकी परवाह
जो हर वक़्त उनकी याद में जीते हैं
Saturday, November 19, 2011
कीमत
नो कोई मुश्किल आती है, ना कोई झूठ कहता है
लाख मुसीबत में दो लफ्ज़ कहने को वक़्त निकल लेता है
अपने बातों से भले ना कहे कोई किसी को
किसी इंसान की कीमत का एहसास इसी से होता है
Thursday, November 17, 2011
किस्मत
जितना चाहा था चाँद ने सितारों को
आज उन्ही के बीच फासलों की खाई है
नहीं किस्मत में मेरी प्यार का नजराना
कमबख्त मौत को भी मुझसे रुसवाई है
परवान
अभी आये महफ़िल में आप मेरे हुज़ूर
जरा माहोल को शायराना तो हनी दीजिये
जल्दबाजी ठीक नहीं इज़हार ऐ इश्क में
ज़रा मोहब्बत को परवान तो चढ़ने दीजिये
Wednesday, November 16, 2011
माँ
वो हंसती है तुम्हे हँसाने के लिए
वो रोटी है तेरी खुशियाँ पाने के लिए
वो रूठ कर जो चली जाए जो तुमसे
मर जाओगे उस माँ को मनाने के लिए
आँखों आँखों में
छुप छुप के देखना अच्छा लगता है
दिल की धड़कन में उनको सुनना अच्छा लगता है
लफ्ज़ होठों पर लाने की ज़रुरत नहीं
आँखों आँखों में बाते करना अच्छा लगता है
निसार
नहीं डर हमे शमशीर और मौत का
की हमे मारने के लिए कुछ और चाहिए
निसार हो जायेंगे तेरी एक अदा पर
क़त्ल होने के लिए मोह्हबत भरी नज़र चाहिए
हिम्मत
कभी जो आये मुश्किल हालात
ना छोड़ना साथ अपनों का कभी
जरा एक बार खाना ज़ख़्म उनके लिए
दुनिया नजीर देगी तेरी हिम्मत की
हौसला
नहीं चुभती कंटीली रहे सफ़र में
जरा कदम बढाओ मंजिल की तरफ
मुश्किल दूर हो ही जायेंगी अपने आप
जब नज़र हो मंजिल की तरफ
Thursday, November 3, 2011
ये दिल
वीरानों में खुश , बहारों में मायूस क्यों है
खाता है ज़ख्म हमेशा फिर भी गुलजार क्यों है
खिलखिलाने लगता है फिर भी बच्चे की तरह
समझ नहीं आता ये दिल इतना मासूम क्यों है
Wednesday, November 2, 2011
तेरी आँखें
कभी शर्म की तस्वीर कभी मोहब्बत का पैगाम देती है
आशिकों के दिल पर ज़ख्म हज़ार करती है
अगर चाहे कोई चाहत को लाख छुपाना
आँखें वही हाल ऐ दिल बयान करती हैं
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